कल यानि 5 दिसंबर 2009 को फिल्म "पा" देखी नागपुर के लिबर्टी सिनेमा में | निस्संदेह अमिताभ बच्चन के बेहतरीन अभिनय और अपने विषय वास्तु के लिए यह फिल्म देखनी चाहिए | लेकिन इसके treatment में कही कुछ कमी ज़रूर रह गयी हैं| फिल्म का पहला half तो बोरिंग हैं लेकिन दुसरे half में फिल्म गति पकड़ लेती हैं| अभिषेक बच्चन राजनीतिज्ञ के रूप में फिट नहीं बैठते हैं| फिल्म में उन्होंने एक विवादित मुद्दे को छेड़ दिया हैं| स्लम के redevelopment के issue को बड़े ही हलके से ले लिया हैं हालाँकि यह फिल्म का subject यह नहीं हैं| इस मुद्दे को विस्तार से अगले पोस्ट में डील करेंगे | विद्या बालन एक बेहतरीन एक्टर हैं और उनका फिल्म का selection बताता हैं कि वो बहुत sensitive भी हैं | आर. बल्कि का निर्देशन सामान्य हैं और अभी उन्हें पटकथा की तरफ ध्यान देना होगा | इल्लैया राजा का संगीत फिल्म की जान नहीं बन पाया हैं| कुल मिलाकर पा एक उच्च कोटि की फिल्म बन सकती थी | चलते-चलते भारत ने टेस्ट क्रिकेट में icc टेस्ट ranking में प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया हैं| ख़ुशी की बात हैं | लेकिन विदेशी पिचों पर अभी उसे और कई टेस्ट जीतने होंगे अपने आपको साबित करने के लिए|
Sunday, 6 December 2009
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