Tuesday, 3 November 2009
SURAIYYA KAMLA DAS
स्नातक की पढाई के दौरान जब कमला दास की अंग्रेजी कविता " द सनशाइन कैट " को प्रोफैसर पढ़ा रहे थे तो उनके चेहरे पर एक अजीब सी घृणा तो नहीं थी लेकिन नेगेटिव टोन तो ज़रूर था | तब शायद मुझे इतना प्रभाव नहीं पड़ा था| लेकिन आज जब मैं जब कमला दास या सुरैय्या कमला दास को पढता हूँ तो निश्चिंत रूप से कह सकता हूँ कि वो इस सदी की बेहतरीन कहानीकार व कवियत्री हैं और इससे भी बढ़कर वो सर्वश्रेष्ट महिला कार्यकर्ता हैं| साहित्य अकादमी की अंग्रेजी पत्रिका इंडियन लिट्रेचर में छपे उन पर लिखे गए आलेखों और उनकी रचनाएँ पढने के बाद अपने प्रोफेसरों के नैतिक व अनैतिक के द्वंद के सिकुडे हुए मस्तिष्क पर एक संवेदना ही प्रकट करने को जी चाहता हैं | कमला दास ने स्त्री-पुरुष संबंधो में बराबरी की मांग की जो पुरुषों को व उनके द्वारा बनाये गए नैतिक व अनैतिकता के पाखंड को एक चैलेन्ज था | कमला दास की सबसे बड़ी विशेषता पश्चिम की महिलावादी लेखको के विपरीत पुरुषों से घृणा न होकर पुरुषों के समकक्ष स्पेस की लडाई हैं| उनके निधन ने भारतीय साहित्य में एक शून्य ला दिया हैं जिसे आसानी से भर पाना असंभव तो नहीं लेकिन मुश्किल तो ज़रूर हैं.
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